लोगों के अज्ञानता, तर्कहीन धारणा, वैज्ञानिक सोच की कमी का फायदा उठा कर और भोले भाले लोगों को ईश्वर का डर दिखा कर, क्या धर्म गुरुओं ने शिक्षा को अपंग बना दिया? और क्या राज्य ने अवमानना करने वाले और वैज्ञानिक लोगों को यातनाएं और सजा ए मौत दे कर, लोगों पर नियंत्रण रखा। किसी को भी नियंत्रण का अहसास तक नहीं हुआ, कैसे? क्योंकि शिक्षा, किताबें, नालिज के sources उसी सिस्टम और धार्मिक सस्थाओ के द्वारा लिखे गए होते थे, जिसे लोग बचपन से रट्टा लगा रहे होते थे। झूठ, मिसिन्फर्मैशन बच्चों के रगो में बहता था। किसी को ईश्वर, चर्च, मंदिर और मस्जिद के विरुद्ध बोलने की इजाजत नहीं थी। अब न्यूटन पैदा नहीं होता, न आइन्सटाइन अब पैदा होता है, न मेरी क्यूरी, जो इस दुनिया में शिक्षा, विज्ञान और धर्म सभी क्षेत्रों को बदल के रख दे| क्या कर रहें आज के स्टूडेंट्स? सरकारी नौकरी की तैयारी, अपने जवानी के अंतिम उम्र तक, जीवन तो जिया नहीं, सिर्फ टारगेट पूरा करते गए,
